
आकाश इस समय अपनी गाड़ी में बैठा हुआ था और गाड़ी ड्राइव कर रहा था । उसकी गाड़ी के सारे शीशे बंद थे। बस ड्राइविंग सीट का शीशा खुला हुआ था और उस खिड़की में से आकाश का आधा हाथ बाहर था । उसके हाथों की उंगलियों में एक सिगरेट दबी हुई थी। पूरी गाड़ी में सिगरेट का धुआं भरा रखा था। आकाश ड्राइव करते वक्त एक के बाद एक सिगरेट जलाए जा रहा था। उसके होठों में सिगरेट दबी हुई थी और दिमाग में कुछ चल रहा था।
थोड़ी ही देर बाद वह अपने फार्म हाउस के सामने मौजूद था। वह गाड़ी से निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। कमरे में जाते वक्त उसका चेहरा एकदम एक्सप्रेशन लैस था और अब तक उसकी सिगरेट भी खत्म हो गई थी


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