
चंचल उस भारी भरकम हल्दी के पात्र को लेकर अपना अगला कदम आगे बढ़ा ही रही थी, कि तभी वह अपने ही लहंगे में उलझ जाती है। और उसके हाथों से वह बर्तन हवा में छूट जाता है । उसका सारा पानी एक फ्लो के साथ भूमि और आकाश पर जाकर गिर जाता है। पानी का डायरेक्शन भी कितना सही था.. सब लोगों को छोड़कर बस उन दोनों को ही भिगो गया।
वह दोनों पूरे हल्दी के पानी से नहा गए थे। और उन्हें ऐसा देखकर सब हैरान हो गए थे। अरुणिमा जल्दी से कहती है, “ अरे यह क्या हो गया ? पानी तुम दोनों के ऊपर कैसे गिर गया?”


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