
सगाई का फंक्शन खत्म हो गया था। और अगले दिन दोपहर में हल्दी का फंक्शन था और शाम को संगीत का फंक्शन था।
सुबह से ही महल में हल्दी और संगीत के फंक्शन की तैयारी हो रही थी। और अरुणिमा, जानवी के साथ-साथ प्रणाली और कीर्ति को भी सांस लेने की फुर्सत नहीं थी। प्रणाली और कीर्ति तो फिर भी चीजों को सिर्फ देख रही थी। लेकिन जानवी ने तो सारी चीज अरुणिमा के ऊपर ऐसे छोड़ दी थी, जैसे की उसकी बेटी की शादी नहीं हो रही है बल्कि अरुणिमा की बेटी की शादी है। और अरुणिमा ने भी सारी जिम्मेदारियां को बखूबी निभाया था । यही बात तो थी अरुणिमा की जो उसे आज भी सबसे जोडे रखती है, कि वह हर रिश्ते को निभाने में यकीन रखती है।


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