
भूमि की आंखों से आंसू आ गए थे। यह पहली बार था जब उसे इस तरीके से किसी के सामने, वह भी पूरे परिवार के सामने ऐसे मुजरिम की तरह खड़ा किया गया था। हालांकि किसी को भूमि पर शक नहीं था । लेकिन आकाश के कहने के बाद सब लोग एक साथ भूमि को देखने लगे थे।
भूमि के लिए यह कुछ नया सा था । और उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कि उसका मन भारी हो रहा है। उसने आज से पहले कभी भी खुद किसी भी काम के लिए दोषी महसूस नहीं किया था । पर आज इन सब की निगाहें उसे दोषी महसूस करवा रही है।


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