
प्रमिला जी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। अरुणिमा का नेचर सच में बहुत सीधा था। इतनी बड़ी रियासत की रानी होकर भी उसका रहन-सहन बहुत ही आम सा था..। प्रमिला जी ने मुस्कुराते हुए अरुणिमा से कहा, “ आपका नेचर तो बहुत अच्छा है रानी साहिबा । आपको देखकर लगता ही नहीं है, कि आपके इतने बड़े-बड़े बच्चे हैं । अब मुझे बहुत खुशी है कि मैंने अमृता को हमारे घर की बहू के रूप में चुना है। वैसे मुझे लगा था कि शायद आप राजा साहब से अलग हो चुकी हैं..।”
“ डायवोर्स नहीं हुआ है हमारा..। मेरी वाइफ बस मेरे साथ नहीं रहती है। ये मेरे साथ नहीं रहती है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसका और मेरा रिश्ता खत्म हो चुका है । वह आज भी मेरी वाइफ है । इसीलिए शादी की हर रस्म में उसका होना उतना ही जरूरी है, जितना मेरा होना जरूरी है।” आस्तिक ने अपनी दमदार आवाज में कहा । तो उसके सामने किसी की कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं हुई।


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