
अरुणिमा के घर के बाहर आस्तिक और अनंत खड़े थे। अनंत आस्तिक से गले लगते हुए कहता है , “ पापा आप जल्दी जा रहे हो।”
आस्तिक मुस्कुराते हुए अनंत के कान में धीरे से कहता है, “ वैसे बेटा मन तो मेरा घर जमाई बनने का करता है। पर क्या करूं तुम्हारी मां मुझे घर में घुसने नहीं देती। 2 दिन के लिए तुमसे मिलने के लिए आता हूं उसमें यह रहने देती है इतना ही काफी है। वरना तुम्हारी मां कितनी भयंकर है यह मैं अच्छी तरह से जानता हूं।”


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