
अरुणिमा जैसी थी उसी हालत में अस्पताल के लिए निकल जाती है। उसने अपनी चप्पल तक नहीं ली थी। वो नंगे पैर ही अस्पताल के लिए निकल गई थी। अरुणिमा के आंसू रुक ही नहीं रहे थे। एक तो वैसे ही वो आकाश को लेकर इतना परेशान हो रही थी, ऊपर से आकाश को इतनी चोट लग गई है ये सुनकर अरुणिमा और ज्यादा घबरा गई थी।
कभी-कभी ऐसा नहीं होता है कि हमें जहां सबसे ज्यादा जल्दी पहुंचना होता है तो ऐसा लगता है की सारी दुनिया की रुकावटें हमारे सामने ही आ गई है? कुछ इसी तरीके का हाल इस समय अरुणिमा का भी हो रहा था। उसे अस्पताल जल्द से जल्द पहुंचना था, पर आज सारी दुनिया की ट्रैफिक उसे ही सड़कों पर मिल रही थी।


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