
एक हफ्ते बाद...
अरुणिमा बालकनी में किसी से बात कर रही थी… “जी चौहान साहब, जी नहीं मैने पेपर देख लिए हैं और मैने उन पर साइन भी कर दिए हैं। आप होटल का काम जल्द खत्म कीजिए मुझे पैसों की जरूरत है।


एक हफ्ते बाद...
अरुणिमा बालकनी में किसी से बात कर रही थी… “जी चौहान साहब, जी नहीं मैने पेपर देख लिए हैं और मैने उन पर साइन भी कर दिए हैं। आप होटल का काम जल्द खत्म कीजिए मुझे पैसों की जरूरत है।

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