
अरुणिमा भाग कर शारदा जी के पास जाती है और उन्हें कस के गले लगा लेती है। वो शारदा जी से लिपटकर रोने लगती है और रोते हुए कहती है… “आई एम सॉरी मां! आई एम सॉरी मुझे माफ कर दो मैं तुमसे गुस्सा थी इसलिए मैंने तुमसे बात नहीं की, मैं मतलबी हो गई थी। अपने मतलब में मैने तुमसे बात तक करने की कोशिश नहीं की मुझे माफ कर दो मां मुझे माफ कर दो!”
अरुणिमा की पकड़ उसकी मां पर मजबूत होती जा रही थी लेकिन उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसकी मां ने उसे गले क्यों नहीं लगाया? उसने अपनी मां को छोड़ा और एक कदम पीछे होकर अपनी मां को ध्यान से देखने लगी। अरुणिमा देखती है कि उसकी मां का वजन पहले से बहुत ज्यादा कम हो गया है लेकिन वो अब कुछ ज्यादा ही डरी डरी सी नजर आ रही है. ऐसा लग रहा है कि अरुणिमा की बातें उनके कानों तक गई ही नहीं थी, वो आसपास के लोगों को घबराई हुई नजरों से देख रही थी..


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