
अरुणिमा आस्तिक के जख्म पर कपड़ा बांध रही थी। अरुणिमा की आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन आस्तिक हंसते हुए उस घाव को ऐसे देख रहा था जैसे उसे दर्द नहीं हो रहा है। अरुणिमा ने रोते हुए कहा… “ये क्या किया आपने राजा साहब?”
पर आस्तिक ने किसी पागल साइको इंसान की तरह हंसते हुए कहा… “तुम्हें क्यों डर लग रहा है? डरो मत ये तो बस गंदा खून है जो मेरे रगों में बह रहा है.. मुझे उसे अपनी रगों से निकाल कर बाहर फेंकना है।”


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