
रॉयल ऑफिस..
आस्तिक अपने केबिन में बैठा हुआ था लेकिन वह काफी परेशान था, कल रात उसने जैसा व्यवहार अरुणिमा के साथ किया था, उसके बाद से ही वह खुद को दोषी महसूस कर रहा था। आस्तिक अपने एक हाथ से अपने सर को मसलते हुआ कहता है.. “यह क्या था? क्या बन गया था मैं कल रात? वह मैं नही था, वह कोई मॉन्स्टर था, जो मेरे अंदर हावी हो गया था। मैंने कल रात लगभग उसे मार ही दिया था। वह तीन बार बेहोश हुई थी, मेरी आंखों के सामने तड़प रही थी लेकिन फिर भी मुझ पर कोई असर नहीं हुआ. ऐसा कैसे हो सकता है? मैं उसके लिए इतना क्रूर कैसे हो गया? क्या यह मेरी गलती थी?”


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