
अरुणिमा जब मिश्री को देखती है, तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है और वह जल्दी से मिश्री को गले लगा लेती है।
ज्योति और रजत भी अरुणिमा से मिलते हैं। तभी वहां पर राजा साहब की आवाज आती है..। “क्या बात है मिश्री! अपनी दीदी से ही मिलोगी, हमसे नहीं मिलना चाहोगी?”


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