
शारदा जी इस समय कैब में थी और वह वापस सिंगल की तरफ आ रही थी। पर पूरे रास्ते वह अपने और प्रताप की मुलाकात को याद कर रही थी और उसके बाद जो प्रताप ने उसे बताया था, उसे सोचते हुए शारदा जी और ज्यादा परेशान हो गई थीं।
शारदा जी ने अपने मन में कहा, “कहीं मैं कुछ ज्यादा ही तो नहीं सोच रही हूं? कहीं यह सब एक इत्तेफाक तो नहीं है? क्या ऐसा हो सकता है कि, आस्तिक का मेरे गुजरे हुए कल से कोई रिश्ता हो? और यह जो प्रताप ने कहा है कि, बड़े राजा साहब की बेटी तो विदेश में मर गई थी। अगर वह कुंवारी ही मर गई थी, तो फिर आस्तिक और उसके भाई-बहन कौन हैं?”


Write a comment ...