
आस्तिक के यह कहते ही शारदा जी के चेहरे का रंग उड़ गया और वह घबराहट के मारे आस्तिक को देखने लगी, जैसे कि उनकी कोई चोरी पकड़ी गई हो।
राजा साहब ने अपना एक हाथ उठाकर तुषार से कहा, “तुम जाओ यहां से। मैं तुम्हें बता दूंगा कि तुम्हें कब से इस प्रिंटिंग प्रेस की बागडोर अपने हाथ में लेनी है।”


Write a comment ...