
अरुणिमा की सूनी आंखें बस फर्श को घूर रही थी। तभी उसकी नजरों के सामने आस्तिक के पैर आ जाते हैं। वो घबराकर अपना चेहरा उठाकर आस्तिक को देखती है, तो आस्तिक कहता है..। “मैंने तुमसे कहा ना, अपनी चीज मेरे बेड से दूर रखना। तुम्हारी जगह यहां जमीन में है। तो आइंदा से मेरी परमिशन के बिना मेरे बेड पर अपने गंदे हाथ मत लगाना।”
आस्तिक के इस खतरनाक ओरे से अरुणिमा डर जाती है और जल्दी से आस्तिक के बेड से हट जाती है। आस्तिक गुस्से में अरुणिमा को घूरता हुआ, कमरे से बाहर चला जाता है। उसके जाते ही अरुणिमा का रहा सहा सब्र भी टूट जाता है और वो अपने घुटनो में सर छुपा कर रोने लगती है।


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