
अरुणिमा घर वापस आ रही थी। बृजेश जी और आशा जी भी उसके साथ थे। अरुणिमा आशा जी के साथ पीछे बैठी हुई थी, जबकि बृजेश जी आगे ड्राइवर के साथ थे। अरुणिमा का चेहरा पूरी तरह से खिड़की के बाहर था और उसका रंग-रूप उदासी से भरा हुआ था।
जब से वो आरुषि से मिलकर आ रही थी, वो पूरी तरह उदास हो गई थीं और आरुषि की बीमारी का सुनकर उनका दिल बेहद दुखी था। अब जब आरुषि खुद ही इलाज नहीं कराना चाहती थी तो ये सुनकर उन्हें और भी बुरा लग रहा था। वो जानती थी कि आरुषि ने गलत किया है और उसे सजा मिलनी ज़रूरी भी है—कानून सबके लिए बराबर है। जिसने जुर्म किया है, उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इस तरह नहीं।



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