
आस्तिक और अरुणिमा गाड़ी के अंदर बैठे हुए थे। आस्तिक का चेहरा पूरी तरह से निराशा से भरा हुआ था और वो अरुणिमा की तरफ देख भी नहीं रहा था। यही बात अरुणिमा को बहुत परेशान कर रही थी। उसने आस्तिक को देखते हुए कहा, “तुम अभी भी बहुत हार्टलेस हो, आस्तिक… तुम्हें मुझे आज भी परेशान करके मज़ा आता है।”
“इस परेशानी की हक़दार तुम खुद हो।” आस्तिक ने अपना हाथ रोका और अपना आईपैड साइड में रखते हुए अरुणिमा को देखकर कहा, “तुम भी तो वही हो — मेरी बात को पहले भी नहीं मानती थी और अभी भी नहीं मानती। हमेशा वही करती हो जिसे करने का मुझे मन करता है। मैंने कहा था कि उस लड़की को अपने साथ मत लो, तो क्या ज़रूरत थी तुम्हें उसे अपने साथ लाने की? तुम्हारे लिए मेरी मर्जी मायने नहीं रखती, न? तभी तो ये करने से पहले एक बार भी तुमने मेरे बारे में नहीं सोचा।”



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