
अरुणिमा ऑफिस के पीछे के रास्ते से निकल चुकी थी और अब वो सीधे एक टैक्सी लेती है और उसे लेकर अस्पताल की तरफ निकल जाती है। कुछ ही देर में टैक्सी हॉस्पिटल के सामने रुकती है और वो टैक्सी से उतरकर रिसेप्शन की तरफ जाने लगती है। उसने विज़िटिंग टाइम रिसेप्शन से पूछा, उसके बाद वो सीधे लिफ्ट की तरफ बढ़ गई। जैसे ही लिफ्ट दूसरी मंजिल पर पहुंचती है, अरुणिमा के दिमाग में अचानक से उसके माता-पिता का ख्याल आता है। उसने तो कल इस बारे में अपने पेरेंट्स को बताया तक भी नहीं था कि आस्तिक ने उसे प्रपोज कर दिया है। लेकिन फिर उसने सोचा कि शायद उन्हें न्यूज़ में इस बारे में खबर मिल गई होगी। अरुणिमा ने अपनी अंगूठी को देखा और मुस्कुराने लगी।
लिफ्ट तीसरी मंजिल पर पहुंच जाती है, लेकिन इससे पहले कि लिफ्ट का दरवाजा खुलता, अरुणिमा को लिफ्ट के बाहर से कुछ खटखटाने की आवाज सुनाई देने लगी। अरुणिमा ने लिफ्ट का दरवाजा खोला तो उसके कानों में एक औरत की तेज चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।



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