
अरुणिमा इस वक़्त अपनी माँ से बात कर रही थी, जब उसकी नज़र उस बोर्ड पर गई जो रास्ते को दर्शा रहा था। उसने देखा कि वो रास्ता सीधे ग्रीन माउंटेन की तरफ़ जा रहा था—उसका और आस्तिक का वो आशियाना, जिसे उन दोनों ने अपने प्यार और मोहब्बत की निशानी की तरह सँजोकर रखा था। यह देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। आस्तिक ने आज भी उनके उस खूबसूरत घर को, जिसे उसने अपने हाथों से सजाया था, सलामत रखा हुआ था।
सामने से आशा जी ने कहा, "अरुणिमा, देखो अगर सब कुछ ठीक है तो मुझे लगता है कि तुम्हें और आस्तिक को शादी कर लेनी चाहिए, वरना कहीं ऐसा न हो कि एक दिन का इंतज़ार तुम्हें इतना भारी पड़ जाए। वैसे भी तुमने उसके लिए एक साल इंतज़ार किया है।"



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