
दोपहर के वक्त आस्तिक और अरुणिमा मुंबई जाने वाली फ्लाइट में थे। आस्तिक ने अरुणिमा को नॉर्मल फ्लाइट में बिजनेस क्लास में ले जाना ही सही समझा। उसने वापस जाने के लिए हेलीकॉप्टर नहीं लिया।
अरुणिमा बिजनेस क्लास की बड़ी सी कुर्सी पर बैठी हुई थी और विंडो की तरफ देखते हुए उसकी आँख लग गई — वो कब सो गई, उसे पता ही नहीं चला। आस्तिक ने आराम से ब्लैंकेट निकाला और अरुणिमा को ढक दिया।



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