
जैसे ही आस्तिक ने नेहा जी के गुज़रे हुए कल का एक कड़वा सच उनके सामने रखा, नेहा जी के हाथ-पाँव ठंडे पड़ जाते हैं और वो गुस्से में आस्तिक को देखने लगती हैं। उन्होंने एक जोरदार थप्पड़ आस्तिक के गाल पर मार दिया, लेकिन आस्तिक को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ा। उल्टा वो नेहा जी को अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से देखते हुए कहता है—
"मार लीजिए, चाहे तो एक और बार मार लीजिए। आपने जन्म दिया है, आपको हक़ है मुझे मारने का। लेकिन सच्चाई से तो आप भी मुँह नहीं मोड़ सकतीं, माँ…"



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