
अरुणिमा की भावनाएं निशांत से छुपी नहीं थीं, या यूं कह लें कि अरुणिमा को इस वक्त सबसे बेहतर सिर्फ़ निशांत ही जानता था। उसे पता था कि अरुणिमा पिछले 1 साल से कितनी ज़्यादा आस्तिक के लिए बेचैन हो रही थी और उसके लिए कितनी ज़्यादा तड़प रही थी। ये बात उसने अरुणिमा की आंखों में देखी थी, क्योंकि अरुणिमा की भावनाएं समझने के लिए उसे शब्दों की ज़रूरत नहीं थी।
उसने कितनी बार देखा कि अरुणिमा ने आस्तिक का नंबर अपनी स्क्रीन पर रखा हुआ है। वो कितनी बार कोशिश करती है उस नंबर को डायल करने की, लेकिन उसकी उंगलियां बीच में ही रुक जाती हैं। उसका चेहरा हताशा और निराशा से इतना भरा रहता था कि निशांत कई बार उसे संभालना चाहता था, लेकिन उसके खुद के कदम नहीं बढ़ रहे थे।



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