
अरुणिमा उस वक़्त बिस्तर के किनारे बैठी हुई थी और आस्तिक बिस्तर पर लेटा हुआ था। डॉक्टर अभी-अभी उसे ड्रिप लगाकर गए थे और उसका पूरा चेहरा पीला पड़ चुका था। आस्तिक को ऐसे देखकर अरुणिमा को बहुत घबराहट हो रही थी। उसे बहुत बुरा लग रहा था—उसकी वजह से आस्तिक को क्या-क्या सहना पड़ रहा है।
कमरे में हीटर ऑन था, आस्तिक का ठंडा पड़ा शरीर धीरे-धीरे गर्म हो रहा था और वो धीरे-धीरे सामान्य भी हो रहा था। लेकिन ड्रिप की वजह से शायद वो अभी भी गहरी नींद में था। वैसे भी उसे आराम की ज़रूरत थी—अस्पताल में अरुणिमा के साथ और उसके बाद देव के साथ भाग-दौड़ करते-करते वो बहुत थक गया था। उसे सच में सुकून चाहिए था, जो उसे सिर्फ़ अरुणिमा के पास मिल सकता था।



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