
आस्तिक, अरुणिमा को लेकर गाड़ी में बैठता है और खुद गाड़ी चलाते हुए वहाँ से निकल जाता है और अरुणिमा बहुत डर रही थी। उसने आस्तिक को देखा और घबराते हुए कहा, "आस्तिक क्या कर रहे हो? क्या पागलपन है ये? तुम्हें पता है तुम मीरा को लगभग मारने वाले थे।"
"मारा तो नहीं, ना? शुक्र मानो कि इतने के बाद भी मैंने वहाँ पर किसी की जान नहीं ली, वरना इरादा तो मेरा पूरा था किसी को जान से मार देने का। पर इस समय मेरे लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी तुम हो। और मैंने सबसे कहा था कि मेरे मामले में तंग ना आए। मैं तुम्हें लेकर चुपचाप वहाँ से चला जाता, पर वहाँ किसी को मेरी बात समझ ही नहीं आ रही थी।"



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