
अरुणिमा आस्तिक को ढूँढने निकली थी और उसे हर जगह तलाश कर रही थी। उसे नहीं पता था कि यह सही है या गलत, परन्तु उसका दिल कह रहा था कि आस्तिक किसी मुसीबत में है और उसे उसे ढूँढना ही है। धीरे-धीरे अरुणिमा पहाड़ी इलाके से सड़क की ओर आ रही थी। उसने देखा कि एक बार फिर घना कोहरा छा रहा है और धीरे-धीरे मौसम बारिश का होने लगा है। यह देखते ही अरुणिमा के दिल में और भी बेचैनी बढ़ गई क्योंकि आस्तिक का कुछ पता नहीं चल रहा था और ऐसे में अगर मौसम फिर से खराब हो जाएगा तो वह खुद भी तूफान में फँस सकती थी।
उसकी साँसें तेज हो गई थीं। वह काफी देर से चल रही थी और आस्तिक अभी भी नहीं मिल रहा था। आखिरकार बारिश फिर से शुरू हो गई। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, वैसे-वैसे तूफान भी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। भले ही पूरी तरह से अंधेरा नहीं हुआ था, लेकिन मौसम बहुत ज्यादा खराब हो चुका था। एक बार के लिए तो अरुणिमा ने यह भी सोचा कि हो सकता है आस्तिक किसी दूसरे रास्ते से वापस फार्म हाउस पहुँच गया होगा।



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