
बाहर मौसम तेज़ी से खराब हो रहा था। बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की कड़क, राहत के बजाय और ज़्यादा डरा रही थी। यह आवाज़ आस्तिक को और घबराने पर मजबूर कर रही थी। उसने जल्दी से अरुणिमा के गले लगकर उसे अपनी बाहों में भर लिया।
अरुणिमा ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "आस्तिक, आराम से। कुछ नहीं हुआ है। बस मौसम खराब है, लेकिन तुम यहाँ सुरक्षित हो। कुछ नहीं हुआ है, रिलैक्स हो जाओ।"



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