
आभा आस्तिक को संभाल रही थी। आस्तिक दर्द से चिल्ला रहा था और आभा उसे संभालने की कोशिश कर रही थी। वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए बस यही कह रहा था कि अरुणिमा को यहाँ से जाने के लिए कहो, वह उसकी शक्ल नहीं देखना चाहता। अरुणिमा का होना ही उसे दर्द दे रहा था, तकलीफ दे रहा था।
आभा यह सब देख रही थी। उसने रिक्वेस्ट करते हुए अरुणिमा की तरफ देखा और बोली,



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