
आस्तिक कपड़े बदल रहा था, तभी उसने घर के बाहर किसी के चिल्लाने की आवाज़ सुनी। जल्दी से कपड़े पहनकर आस्तिक बाहर आया तो हैरान रह गया। घर के बाहर कुछ लोग खड़े थे, उनके हाथों में बड़े-बड़े मोटे डंडे और हॉकी स्टिक थीं। उनमें से एक आदमी, जो सबसे आगे था, अपने हाथों में पिस्तौल लिए खड़ा था। आस्तिक घूमती हुई नज़रों से सबको देखने लगा।
वहीं, दादी और शंभू अपने हाथ जोड़े उन लोगों के सामने खड़े थे। वह आदमी गुस्से में चिल्लाते हुए शंभू और दादी को देखता है और फिर शंभू से कहता है, "पिछली बार तुझे बोला था ना कि इस महीने पूरा पैसा चाहिए! साला, तू पैसे लेकर बैठ गया है और ऊपर से देने का नाम भी नहीं ले रहा! मैंने क्या भिखारियों के लिए कोई संस्था खोल रखी है जो तुम जैसे लोगों को पैसे देता रहूँ, और तुम लोग मेरा पैसा खाकर यहाँ सुकून की नींद सो जाओ! चुपचाप मेरा पैसा वापस कर वरना अभी यहीं तुम दोनों को मारकर तुम्हारे इस घर को बेचकर अपना पैसा वसूल करूँगा!"



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