
आस्तिक की वजह से मेरे बच्चों का ऐसा-ऐसा जीवन जीना संभव नहीं है। अगर वो इस दुनिया में आने से पहले ही खत्म हो जाएंगे, तो उनका क्या ही अस्तित्व होगा? उनके बच्चों का दोष बस इतना है कि वो आस्तिक रायचंद के बेटे-बेटी हैं, इसके अलावा उनका और कोई दोष नहीं है। काश, अरुणिमा किसी गरीब घर में पैदा हुई होती और उसकी शादी किसी मिडिल क्लास इंसान से हुई होती, तो आज वो भी अपने बच्चों के साथ एक अच्छे भविष्य की कल्पना कर रही होती। एक गरीब और मिडिल क्लास आदमी चाहे दिन-रात मेहनत ही क्यों ना करता हो, लेकिन वो ऐसा कोई कदम नहीं उठाता जिससे उसके परिवार को खतरा हो। बहुत मजबूरी ना हो, तो कोई भी पिता अपने बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। लेकिन आस्तिक के पास तो ऐसा कोई कारण भी नहीं है। वो तो बस इसलिए बच्चा नहीं चाहता क्योंकि उसे बच्चा नहीं चाहिए… आज अरुणिमा को अपनी अमीरी एक श्राप लग रही थी। काश, वो किसी बड़े दौलतमंद परिवार का हिस्सा न होकर कोई मामूली सी लड़की होती, तो शायद उसकी ज़िंदगी कुछ और होती।
"दीदी, क्या ये अंकल आपको घर से निकाल देंगे?"



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