
आस्तिक उस समय नशे की हालत में आया था, और अरुणिमा उसे हैरानी से देख रही थी। आस्तिक दरवाजे के पास खड़ा था और अपनी लाल निगाहों से अरुणिमा को घूर रहा था। वह एक-एक कदम अरुणिमा की ओर बढ़ा, तभी उसका पैर टेबल के कोने से टकरा गया। वह गिरने को हुआ, मगर तभी उसने टेबल पकड़कर खुद को संभाला।
आज तक जब भी आस्तिक गिरने को होता, तो अरुणिमा ने हमेशा उसे संभालने के लिए हाथ बढ़ाया था, लेकिन इस बार जब उसने देखा कि आस्तिक ने खुद को संभाल लिया है, तो वह अपनी जगह पर ही खड़ी रही। आस्तिक धीरे-धीरे खड़ा हुआ, लेकिन उसके चेहरे पर नशे का असर साफ झलक रहा था। अरुणिमा हैरान थी—जब वह घर से निकला था, तो कहा था कि वह अपनी कंपनी की एक मीटिंग के लिए जा रहा है। फिर वहाँ ऐसा क्या हुआ कि उसकी यह हालत हो गई?



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