
आस्तिक अपने केबिन में बैठा हुआ था। उसके सामने फाइलों का ढेर रखा हुआ था, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ अरुणिमा ही चल रही थी। कल रात अरुणिमा के साथ जो वक्त उसने बिताया था, वो आस्तिक से भुलाए नहीं भूल रहा था। अभी बस कुछ ही घंटे हुए थे उसे अरुणिमा को छोड़कर आए हुए, लेकिन उसका दिल अभी से ही बेचैनी और तड़प महसूस कर रहा था। जब भी वो फाइलों पर ध्यान लगाने की कोशिश करता, उसके कानों में अरुणिमा की हंसी गूंजने लगती, और यही चीज उसकी हालत और ज्यादा खराब कर रही थी। वो चाहकर भी अपने काम पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था।
आस्तिक ने झुंझलाकर सारी फाइलें एक तरफ धकेल दीं, क्योंकि जब मन काम में लग ही नहीं रहा था, तो उसने खुद को थोड़ी देर के लिए रिलैक्स करने की सोची। सिगरेट निकालकर उसने अपने होठों तक लगाई ही थी कि तभी उसके फोन का नोटिफिकेशन बजा। ये नीरज का मैसेज था। आस्तिक ने सिगरेट जलाते हुए मैसेज पढ़ा, और उसका चेहरा एक बार फिर सख्त हो गया।



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