
भाभी, कंग्रॅजुलेशंस...
अरुणिमा ने यह आवाज़ सुनकर चौंककर पीछे देखा। उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। यह आस्तिक की कज़िन और दूर के रिश्ते में उसकी बहन थी। इसका नाम आभा था। फिलहाल नेहा जी के बाद आभा ही थी, जिससे अरुणिमा थोड़ा हँसकर बात करती थी। कुशल, पहले आभा के माता-पिता गुज़र गए थे, इसीलिए नेहा जी ने उसे अपने साथ घर ले आई थीं। अब वैसे तो आभा सेल्फ-इंडिपेंडेंट लड़की थी, वह आस्तिक की कंपनी में ही इंटर्नशिप कर रही थी और फिलहाल अपने दोस्तों के साथ पीजी में रहती थी। आभा और आस्तिक ने उसे घर आकर रहने के लिए कहा था, लेकिन आभा का कहना था कि पीजी में रहना ऑफिस के नज़दीक पड़ता है।
आस्तिक और अरुणिमा की शादी में जिसने सबसे ज़्यादा खुलकर इंजॉय किया और अपने भाई की बारात में सबसे आगे बढ़कर डांस किया था, वह आभा ही थी।
आभा को अपने सामने देखकर अरुणिमा खुश हो गई और मुस्कुराते हुए कहती है, "आभा, कहाँ रह गई थी तुम? अब आ रही हो? तुम्हें पता है, मैं तुम्हें कितना मिस कर रही थी। तुम तो मुझसे मिलने घर भी नहीं आती हो।"
आभा, अरुणिमा का हाथ पकड़कर उसे साइड टेबल पर ले जाती है और कहती है, "अरे सॉरी भाभी। आप तो जानती हैं ना, भाई के ऑफिस में मेरी इंटर्नशिप चल रही है। भाई वैसे खाने के लिए बहुत अच्छे हैं, लेकिन वे थोड़े से स्ट्रिक्ट और खड़ूस हैं। अपने भाई की बहन होने के नाते मैं उनका दिल तो रख सकती हूँ, लेकिन उनकी कंपनी की एम्प्लॉई होने के नाते मुझे अपना काम टाइम पर करना ही होता है। इसलिए मैं घर पर नहीं रहती हूँ और पीजी में शिफ्ट हो गई हूँ। रही बात आपसे मिलने के लिए घर आने की, तो फ़िक्र क्यों कर रही हैं? बस कुछ महीने और, फिर मेरी इंटर्नशिप खत्म हो जाएगी। उसके बाद मैं एक लंबी छुट्टी पर आऊँगी। फिर देखना, खूब सेवा करवाऊँगी आपसे। फ़ुल नखरे देखेंगे आप अपनी छोटी ननद के।"
खिलखिलाकर हँसते हुए आभा कहती है। अरुणिमा के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है। उसने एक नज़र बेला को देखा, जो मर्दों के बीच शो-ऑफ करती हुई नज़र आ रही थी। उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, "तुम्हारे नखरे तो फिर भी मैं उठा सकती हूँ। अच्छा है कि तुम्हारी जगह बेला नहीं है, वरना उसके नखरे और हॉरर एटीट्यूड मेरे बस के नहीं हैं।"
बेला के रवैये से तो पूरा घर वाकिफ था। आभा ने एक नज़र बेला पर डाली और फिर अरुणिमा से पूछा, "क्या सीन चल रहा है?"
अरुणिमा हल्की मुस्कान के साथ बोली, "कोई सीन नहीं है। बस बेला ने तुम्हारे भाई को अभी-अभी उनकी शादी की सालगिरह की मुबारकबाद दी है।"
"बस? भाई को शादी की सालगिरह तो आपकी भी है ना? उसने आपको कंग्रॅजुलेशन नहीं कहा?" आभा हैरानी से पूछती है। अरुणिमा कंधे उचकाते हुए बोली, "पता नहीं। शायद उसके लिए सिर्फ़ तुम्हारे भाई की सालगिरह है। बाकी तुम खुद जाकर पूछ लो।"
आभा गुस्से में उठती है और अपने हाथ की एक उंगली अपनी नाक पर रगड़ते हुए कहती है, "अभी पूछती हूँ। क्या पार्टी में बस भाई अपनी एनिवर्सरी सेलिब्रेट कर रहे हैं?" यह कहते हुए आभा पैर पटकते हुए चली जाती है। अरुणिमा मुस्कुराते हुए उसे देखती रह जाती है।
वैसे, अरुणिमा को इस पार्टी में किसी से कोई मतलब नहीं था। वह आस्तिक और उसके परिवार को बहुत मुश्किल से जानती थी। यहाँ वह चेहरों को भी ठीक से नहीं पहचानती थी। शादी के बाद जिनसे उसने मुलाकात की थी, वही लोग उसके लिए परिचित थे। बाकी लोग उसे पूरी तरह अनजाने लग रहे थे। इतने दिखावटी चेहरों के बीच अरुणिमा वैसे भी अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थी। उसने टेबल से एक ऑरेंज जूस का ग्लास लिया और पीने लगी। उसे पार्टी में घूमने-फिरने या लोगों से मेल-जोल बढ़ाने का कोई शौक नहीं था।
आभा को नेहा जी ने रास्ते में रोक लिया और अपने एक दोस्त के बेटे से मिलवाने के लिए अपने साथ ले गईं। आभा इन्हीं सब चक्करों की वजह से घर नहीं आती थी। आस्तिक अपनी एक बिज़नेस पार्टनर के साथ खड़ा था, उसके हाथ में ड्रिंक का ग्लास था। उसका बिज़नेस पार्टनर वहाँ से चला गया, और आस्तिक भी जाने ही वाला था कि उसके सामने बेला आ गई। वह अपनी चैंपेन का ग्लास उसके सामने हिलाते हुए बोली, "कंग्रॅजुलेशंस भाई! आपने अपनी जीत की तरफ़ एक और कदम बढ़ा लिया है।"
आस्तिक ने मुस्कुराते हुए उसके ग्लास से अपना ग्लास टकराया और कहा, "थैंक्स सिस्टर। वैसे कंग्रॅजुलेशंस तुम्हें भी। आखिर इन सब में तुम्हारा भी तो फ़ायदा है।"
एक जहरीली नागिन और एक रंग बदलने वाला भेड़िया—दोनों भाई-बहन एक-दूसरे को बराबर की टक्कर दे रहे थे। दोनों के चेहरे पर शातिर मुस्कान और मक्कारी झलक रही थी।
तभी उनका ध्यान पुष्कर जी की तरफ़ गया, जो अपने माफ़िया के ग्रुप के साथ बात कर रहे थे। बेला ने अपने ड्रिंक का ग्लास हवा में घुमाते हुए कहा, "वैसे सुनने में आया है, डैड आज अपनी रिटायरमेंट अनाउंस करने वाले हैं। शायद आज ही वे अपनी कुर्सी आपको सौंप देंगे।"
आस्तिक ने अपना ड्रिंक उठाया ही था कि उसके हाथ रुक गए। वह हैरानी से बेला की तरफ़ देखते हुए बोला, "क्या? यह तुम क्या कह रही हो? तुम्हें कैसे पता कि डैड आज अपनी रिटायरमेंट अनाउंस करने वाले हैं और वे अंडरवर्ल्ड की अपनी पोस्ट छोड़ देंगे?"
बेला हँसते हुए बोली, "सीरियसली भाई? आपको लगता है कि इतने लोगों की बातें सुनने के बाद और इतनी तीखी निगाहों का सामना करने के बावजूद मैं यहाँ टिक सकती हूँ, तो क्या इतनी सी बात नहीं जान सकती? आपको क्या लगता है, आपकी और आपकी नाम की बीवी की एनिवर्सरी की पार्टी यहाँ क्यों रखी गई है? फ़ार्महाउस में क्यों नहीं? क्योंकि डैड आज अपनी रिटायरमेंट अनाउंस करेंगे। देख रहे हैं वह माफ़िया टेबल? वहाँ रखी फ़ाइल उनकी रिटायरमेंट की फ़ाइल है। सातों पोज़िशन्स के लिए अलग-अलग फ़ाइल्स तैयार हैं, ताकि वे आपको आपकी पोज़िशन सौंप सकें। और एक बार आपको वह मिल गया, तो आप चाहें तो अपनी बोरिंग बीवी से भी आज़ाद हो सकते हैं।"
बेला की बात सुनकर आस्तिक के चेहरे पर एक डेविल स्माइल आ जाती है और उसकी नज़रें सिर्फ़ पुष्कर जी की तरफ़ ही थीं। अपने गिलास को खुशी-खुशी पीने के बाद आस्तिक उसे टेबल पर रखता है और खुश होते हुए बेला को देखकर कहता है, "बेला, अगर यह सच हुआ ना तो आज की रात यह शादी की सालगिरह और उस गँवार अरुणिमा के साथ रिश्ते की आखिरी रात होगी। मैंने तो शादी के बाद ही डाइवोर्स पेपर्स बनवा लिए थे, बस सही वक़्त का इंतज़ार है। एक बार मुझे वह पोज़िशन मिल जाए जो मेरी है, उसके बाद सबसे पहले अरुणिमा को अपनी ज़िंदगी से बाहर करूँगा।"
बेला के चेहरे पर भी एक धूर्त मुस्कान थी। उसने अपनी एक आँख बड़ी करते हुए अपने भाई को इशारों में कुछ समझाने की कोशिश की। आस्तिक खुश होकर बेला के कंधे पर थपकी देते हुए बोला, "तुम फ़िक्र मत करो, मुझे मेरा वादा अच्छी तरह याद है। तुम्हारे हिस्से की प्रॉपर्टी और लंदन में तुम्हारा अपना फ़ैशन हाउस।"
आस्तिक की बात सुनकर बेला के चेहरे पर भी जहरीली मुस्कान आ गई। उसने हाँ में सिर हिलाया, और दोनों भाई-बहन अपने-अपने ड्रिंक के साथ पुष्कर जी की तरफ़ देखने लगे, जो माफ़िया संगठन के साथ किसी गहन चर्चा में व्यस्त थे।
हमेशा की तरह, अरुणिमा कुर्सी पर आराम से बैठी हुई थी। यह पार्टी उसे बोर कर रही थी। तभी उसका फ़ोन वाइब्रेट होता है। उसने देखा, उसकी माँ का मैसेज आया है, जिसमें उन्होंने शादी की सालगिरह की मुबारकबाद दी थी। अरुणिमा ने गहरी साँस लेते हुए सोचा, माँ ने रात में मैसेज क्यों किया? फ़ोन क्यों नहीं किया? कभी-कभी तो उसे ऐसा लगता है कि शादी के बाद उसके माता-पिता उससे दूर हो गए हैं। शादी के बाद उनकी ज़िम्मेदारियाँ तो ख़त्म हो गईं, लेकिन अरुणिमा को एहसास था कि उसके माता-पिता ने उसके लिए बहुत कुछ किया है। अपनी माँ के मैसेज का "थैंक यू" रिप्लाई करते हुए अरुणिमा ने फ़ोन टेबल पर रख दिया।
"तुम्हारे हसबैंड ने तुम्हें फिर से अकेला छोड़ दिया... वेरी बैड।"
यह आवाज़ सुनकर अरुणिमा चौंक गई। उसने चेहरा उठाकर देखा तो सामने चेतन खड़ा था। वह अरुणिमा के पास वाली कुर्सी खींचकर उसके बगल में बैठ गया। उसने मुस्कुराते हुए अरुणिमा की तरफ़ देखा, लेकिन अरुणिमा को उसे देखकर केवल झुंझलाहट हो रही थी। वह खुद को शांत रखते हुए कोई प्रतिक्रिया न देने का मन बनाती है और वहाँ से जाने का विचार करती है।
"तुम्हारे पति तुम्हें हर बार अकेला छोड़कर चला जाता है, सही कहूँ तो देखो, यह पार्टी तुम्हारे नाम की है और तुम यहाँ अकेली बैठी हुई हो," चेतन ने कहा। उसके मुँह से शराब की बदबू आ रही थी, जिसे अरुणिमा ने चेहरा दूसरी तरफ़ घुमाते हुए कहा, "तुमने पी रखी है।"
चेतन हँसने लगा और बोला, "नहीं, बस मेरे भाई की सालगिरह की खुशी में दो-तीन शॉट टकीला लिया है। वैसे मुझे शराब की आदत है। जैसे तुम्हारे पति के ऊपर इसका असर नहीं होता, वैसे ही मुझ पर भी नहीं होता।"
अरुणिमा वहाँ से खड़ी हो गई और अपना बैग लेते हुए बोली, "पार्टी अभी बाकी है, जाकर और पी सकते हो। क्योंकि ना तो मुझे मेरे पति के पीने से कोई प्रॉब्लम है और ना तुम्हारे पीने से।"
इतना कहकर वह वहाँ से जाने लगी, तभी चेतन ने उसकी कलाई पकड़ ली। अरुणिमा की आँखें गुस्से से लाल हो गईं और उसने चेतन को घूरते हुए देखा। चेतन तिरछी मुस्कान के साथ बोला, "इतनी भी क्या जल्दी है जाने की? अभी तो हमने बात शुरू ही की है।"
अरुणिमा ने उसकी पकड़ से अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश की और गुस्से में बोली, "चेतन, हाथ छोड़ो मेरा। मैं यहाँ कोई तमाशा नहीं करना चाहती।"
अरुणिमा का लहजा भले ही शांत था, लेकिन उसमें चेतावनी थी। चेतन उसकी बात को नज़रअंदाज़ करता हुआ उसकी कलाई और कसकर पकड़ने लगा। तभी एक बड़ा और मज़बूत हाथ चेतन की कलाई पर आया और एक झटके में अरुणिमा की कलाई को छुड़ा दिया।
अरुणिमा की नज़र जब उस हाथ पर पड़ी तो उसने तुरंत पहचान लिया। उस हाथ की हथेली पर एक लाल दिल बना हुआ था, जिसमें खूबसूरती से "A" लिखा हुआ था। उसे पहचानने में देर नहीं लगी कि यह हाथ आस्तिक का है।
आस्तिक उनके बीच में आकर खड़ा हो गया और चेतन को गुस्से भरी नज़रों से देखते हुए कहा, "हाउ डेयर यू? हिम्मत कैसे हुई मेरी बीवी को हाथ लगाने की?"
आस्तिक की यह बात सुनकर अरुणिमा हैरान हो गई और उसे देखकर सन्न रह गई।



Write a comment ...